Published on: 15 Jun 2026
*एम.एससी. पर्यावरण विज्ञान में प्रवेश लेकर बनाएं उज्ज्वल भविष्य : डॉ. सुमन नागपाल।*
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर (रेवाड़ी) के पर्यावरण विज्ञान विभाग में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एम.एससी. पर्यावरण विज्ञान में प्रवेश हेतु पंजीकरण प्रक्रिया जारी है। इच्छुक विद्यार्थी 20 जून 2026 तक अपना प्रवेश पंजीकरण फॉर्म भर सकते हैं। विभाग में कुल 20 सीटें उपलब्ध हैं।
पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुमन नागपाल ने विद्यार्थियों से पर्यावरण विज्ञान जैसे उभरते और रोजगारपरक विषय में प्रवेश लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत विकास जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है। एम.एससी. पर्यावरण विज्ञान विद्यार्थियों को वैज्ञानिक ज्ञान, शोध क्षमता और व्यावसायिक कौशल प्रदान करता है, जिससे उनके लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर के अनेक अवसर उपलब्ध होते हैं।
डॉ. सुमन नागपाल ने बताया कि विभाग में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षण एवं शोध सुविधाएं उपलब्ध हैं। विभाग के शोधार्थियों ने अपने उत्कृष्ट अनुसंधान कार्यों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। शोधार्थियों को विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर उनके शोध कार्यों के लिए अनेक पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिससे विभाग की शैक्षणिक एवं शोध उत्कृष्टता को नई पहचान मिली है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण परामर्श कंपनियां, सरकारी विभाग, अनुसंधान संस्थान, गैर-सरकारी संगठन (NGOs), उद्योग क्षेत्र, शिक्षण संस्थान तथा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। इसके अतिरिक्त विद्यार्थी पीएच.डी., अनुसंधान तथा अकादमिक क्षेत्र में भी अपना सफल भविष्य बना सकते हैं।
डॉ. सुमन नागपाल ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की कि वे समय रहते प्रवेश पंजीकरण करवाएं और पर्यावरण विज्ञान विभाग से जुड़कर अपने उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखें। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल करियर निर्माण का माध्यम ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी प्रदान करता है। अधिक जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट से दाखिला सूचना विवरिणिका 2026 देख सकते हैं एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग में संपर्क कर सकते हैं।